Chalak Budhiya | चालाक बुढ़िया

यही मौका है। इस चालाक बुढ़िया से बचने का वो तो भगवान का शुक्र है रात में मेरी आग नहीं लगी। अगर जरा सी भी चूक होती तो ये मेरा काम तमाम कर चुकी होती। अब इससे पहले ये बुढ़िया आए जल्दी से अपने पैसों की पोटली लेता हूं और यहां से भाग जाता हूं। अरे इस संदूक पर तो ताला लगा है मुझे ये ताला तोड़ना होगा अब पर कैसे तोड़ो।

तभी अधिक को वहां एक पत्थर पड़ा दिखाई देता है। बड़ी मुश्किल से एक ही हाथ से जैसे तैसे वे पत्थर को उठाता है और ताला तोड़ने की कोशिश करता है। उसकी कोशिश कामयाब होती है और संदूक का ताला टूट जाता है। वह खुश हो जाता है और जैसे ही वह पोटली उठाने लगता है वो देखता है अरे।

अच्छा ये अपना सौ का नोट भी इसमें संभालकर रखा हुआ है। इस ठगी बुढ़िया ने हैं ये भी उठा लेता हूं तभी उसको सबक मिलेगा कि किसी लाचार व्यक्ति को बहलाकर उसको लूटने की क्या सजा मिलती है।

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हरिपुर गांव में एक लड़का अपनी बूढ़ी मां के साथ रहता था। उसके एक हाथ और एक पैर था इसी वजह से लोग उसे अंधा कहकर बुलाते थे। अतः जब अपनी बूढ़ी मां को काम करते देखता तो उसे बहुत दुख होता था पर अपने अपाहिज होने की वजह से वो चुप हो जाता था। एक दिन उससे रहा नहीं गया और वह अपनी मां से बोला मां मैं भी पैसे कमाने शहर जाऊंगा फिर तुम्हें किसी भी बात की कोई तकलीफ नहीं होगी। देखना हमारे पास बहुत पैसे होंगे। मां मैं शाम तक पैसे कमा कर वापस आ जाऊंगा।

बेटा तू शहर कैसे जाएगा 83 खाते हैं एक पैर है तू अपनी देखभाल कैसे करेगा और चला भी गया तो बेटा पैसे कैसे कमा पाएगा।

मां तो बस जाने की इजाजत दे दे बाकी मुझ पर छोड़ दे मैं चला जाऊंगा मैं तेरी और तकलीफ नहीं देख सकता मां ठीक है बेटा कई शहर में अपना ध्यान रखना मैं रोटी और सब्जी तेरे लिए बांधती हूं। रास्ते में काली न मां से जिद करके अथवा शहर की बस में बैठ गया। उसे तो बस मां के लिए पैसे कमाने थे। इसी आस में वह घर से निकला था। कुछ घंटों में आधा शहर पहुंच गया था। पहली बार शहर आया था। वह इधर उधर घूमता रहा। वह कभी किसी दुकान पर काम मांगता। कभी किसी दुकान पर। इसी तरह मोहित पंसारी की दुकान पर काम मांगने पहुंचा।

मैं गांव से काम की तलाश में आया हूं। मुझे कोई काम मिलेगा तो वह क्या काम धाम है। तेरा तो एक हाथ और एक पैर है तो क्या काम करेगा। मैंने मेरे बॉस तेरे लिए कोई काम चलाया जा। अब मैं क्या करूं। मैंने मां को वादा किया था कि पैसे कमाकर ही गांव वापस लौटूंगा। पर यहां तो कोई काम नहीं दे रहा।

चलते चलते एक सब्जी मंडी में पहुंच गया। सब्जी मंडी में काफी भीड़ थी। अगर सोच में पड़ गया कि यहां तो काफी भीड़ है। मैं ऐसा क्या करूं कि शाम तक मेरे पास पैसे इकट्ठे हो जाएं। पहले थोड़ी देर बैठ जाता हूं फिर सोचता हूं।

हां अगर वही सब्जी मंडी में जमीन पर एक किनारी कपड़ा बिछाकर बैठ गया। तभी वहां से गुजरते हुए एक आदमी ने आदमी को देखकर सोचा शायद कोई जरूरतमंद है। उसने एक रुपए का सिक्का अजय के आगे रखा और चला गया।

अठन्नी सोचे कि मुझे पता है मेरी हालत देखकर कोई भी काम नहीं देगा। पर यदि शाम तक मैं यहीं पर बैठा रहूं तो इस तरीके से मेरे पास बहुत से पैसे इकट्ठे हो जाएंगे।

अदा वहीं बैठकर पैसे कमाने का सोचता है और जोर जोर से चिल्लाकर आवाज लगाने लगता है। अल्लाह के नाते देनदार जात नहीं देनदार से खानसामा नोखा आदि को पूरे देश से गुजारा। गांव इसके अंदर कैसे सदाचार का समाज व खाप हो ये भी तय कर लेना। फेड ने ब्याज राहत ऐसी कर दी कि राजनैतिक श्यामा नोखा अड्डा के पास सारे पैसे इकटठा मां के पैसों को देखकर अड्डा बहुत खुश हुआ उसने सोचा कि मेरे पास तो बहुत सारे पैसे इकट्ठे हो गए हैं पर अब तो सुबह से शाम हो गई है। कुछ ही देर में रात हो जाएगी अगर मैं इस वक्त गांव के लिए निकला तो रास्ते में चोर डाकू न लूट ले। क्या करूं कहां जाऊं सब्जी मंडी में खड़ी एक बूढ़ी महिला लगातार अगली कड़ी नजर रखे हुए थी। वह सोच में डूबा देखकर उसके पास आई और बोली बेटा मैं बडी देर से देख रही हूं तुम परेशान दिख रहे हो। देखने में तो तुम भले घर के लग रहे हो। मोची अपनी परेशानी बताओ शायद मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकूं।

मां जी मैं गांव से शहर अपनी बूढ़ी मां के लिए पैसे कमाने आया था पर अब सुबह से शाम हो गई है। मेरे पास ही पैसों की पोटली है। रास्ते में कोई लूट न ले इसलिए सोच रहा था कि रात गुजारने के लिए कोई जगह मिल जाए तो रात रुककर सुबह गांव लौट जाओ। परिजन जान शहर में मैं किसी को नहीं जानता। इस वक्त कहां जाऊं बेटा।

अगर तुम मुझ पर विश्वास कर सको तो मेरा घर यहीं पास में ही है तुम मेरे साथ चलो और रात में आराम से रुक कर कल सुबह गांव वापस चले जाना। मेरे घर में तुम्हें किसी भी प्रकार का कोई डर नहीं। बूढ़ी महिला की बात सुनकर अच्छा सोचने लगा।

रात में गांव जाना भी ठीक नहीं। इन अम्मा के साथ चला जाता हूं। अब इस वक्त और कहां जाऊंगा। कोई जगह भी तो नहीं है कि ठीक है अम्मा अब मैं आपके साथ ही चलता हूं।

अंदर कुछ सोचे समझे बिना ही उस महिला के साथ जाने को तैयार हो जाता है। घर पहुंचने पर महिला उसे कहती है बेटा तुम हाथ मुंह धोकर या चारपाई पर बैठो मैं तुम्हारे लिए भोजन लाती हूं। बेडरूम आराम से सो जाना कि बेटा मौजूद। हमारे पास पैसों की पोटली है इसमें है वो तुम मुझे दे दो तो मैं उसे संभालकर संदूक में रख देती हूं और ताला लगा देती हूं। सुबह जाते वक्त ले लेना अच्छा भोजन करके जैसे ही सोने लगते हैं उसे आवाज सुनाई देती है ऐसे देखो तो एक ही बार में खत्म कर दूंगी। वैसे एक बार चाकू की धार तेज कर लूं पेड़ तेरा इसका काम क्या समझो। जैसे तैसे पैसे जोड़ कर गांव ले जाना चाहता है। मेरे हाथों से जिंदा बचेगा तभी तो जा पाएगा। महिला पत्थर पर चाकू घिसने लगी। उसकी इस हरकत को सुन रहा था। वह थोड़ा चौकन्ने गोल नींद में होने का नाटक करने लगा। जैसे ही महिला चाकू की धार लगाने लगती है अंदर गुनगुनाने लगते हैं।

मां की आगे मटका निकले या मैं वे गिर रहे आते हैं। लोग पत्थर चाकू खिसके तू अजीब मारे गए मैंने तेजी से यह नींद में क्या बड़बड़ा रहा है ये तो सोया ही नहीं। पहले इसे सोने देते हुए तेज चाकू भी होंगे और फिर वही दोहराने लगता है। बूढ़ी महिला फिर चाकू घिसकर रोती थी। ऐसा करते करते पूरी रात बीत जाती है। तू अंधा भी जादू नहीं सोता। बूढ़ी महिला सोचती है पैर एक ही रास्ता है इस पैसों की पोटली मेरे पास ही है। मैं थोड़ी देर के लिए बाजार जाने का बहाना करके घर से बाहर चली जाती हूं। जैसे ही ये इधर उधर होगा तो रिसीवर किस की पोटली गायब करती होंगी और बोल देंगी कि चोर चुराकर ले गए थोड़ी देर रोएगा और चुपचाप यहां से चला जाएगा। इसे देख रहे हैं ऐसे से मुझ पर शक भी नहीं होगा। ऐसे हैं डैडी बेटा उठ गए याद शायद तुम्हें नींद नहीं आई। मैंने देखा रात भर तुम करवटें ही बदलते रहे। कोई बात नहीं तुम नहा धोकर कुछ खा लो मैं जरा कुछ जरूरी सामान लेकर आती हूं। बूढ़ी महि

बाजार का बहाना करके घर से बाहर चली जाती है कभी आधा सोचता है।

यही मौका है। इस चालाक बुढ़िया से बचने का वो तो भगवान का शुक्र है रात में मेरी आग नहीं लगी। अगर जरा सी भी चूक होती तो ये मेरा काम तमाम कर चुकी होती। अब इससे पहले ये बुढ़िया आए जल्दी से अपने पैसों की पोटली लेता हूं और यहां से भाग जाता हूं। अरे इस संदूक पर तो ताला लगा है मुझे ये ताला तोड़ना होगा अब पर कैसे तोड़ो।

तभी अधिक को वहां एक पत्थर पड़ा दिखाई देता है। बड़ी मुश्किल से एक ही हाथ से जैसे तैसे वे पत्थर को उठाता है और ताला तोड़ने की कोशिश करता है। उसकी कोशिश कामयाब होती है और संदूक का ताला टूट जाता है। वह खुश हो जाता है और जैसे ही वह पोटली उठाने लगता है वो देखता है अरे।

अच्छा ये अपना सौ का नोट भी इसमें संभालकर रखा हुआ है। इस ठगी बुढ़िया ने हैं ये भी उठा लेता हूं तभी उसको सबक मिलेगा कि किसी लाचार व्यक्ति को बहलाकर उसको लूटने की क्या सजा मिलती है।

अस्वीकरण :- यह कहानी Best Hindi Kahaniya से ली गई है

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