Gareeb Ki Rakhi | गरीब की राखी

मां उठो मां यूं ही दवाई खा लूं।

हां बेटा सिर्फ मदद करती बेटा तो शरीर उठाने को राजी नहीं है। सीनू अपनी मां सविता को सहारा देकर बिस्तर पर बिठाती है। सीनू बहुत ही समझदार और एक जिम्मेदार लड़की थी। कई साल पहले एक सड़क हादसे में सीनू ने अपने पिता को खो दिया था।

यह भी पढ़ें :- Best moral stories

इस हादसे के बाद से ही सोनू की मां सविता बहुत बीमार रहने लगी। धीरे धीरे तबीयत बिगड़ती गई और वो बिस्तर पर आ गई। अब सीनू को ही सबकुछ संभालना था। उसने शहर के मेन मार्किट में सबसे बेचना शुरू कर दिया। छोटी सी उम्र में वो घर का खर्चा चला रही थी लेकिन किसी अच्छे डॉक्टर से अपनी मां का इलाज करवा पाना उसके बस से बाहर था।

Gareeb Ki Rakhi

दवाई खाने के बाद सविता सीनू के सिर पर हाथ रखती है और कहती है तू ने कुछ खाया पिया है मां खा लिया तो मेरी चिंता मत करो बस्तीराम करू और सबसे जरूरी बात खुश रहा करो मैं बाजार जारी हूं कोई भी परेशानी हो तो पडोस से बिमला मौसी को बुला ली ना तीखे सविता सीनू को एकटक देख रही थी और अचानक रोने लगी। सीनू ने उसके आंसू पोछे और उससे पूछा क्या हुआ मां क्या सोचने लगी तुम मुझे माफ कर दे बेटा। इतनी सी उम्र में तुझे कितनी मेहनत करनी पडी और में सारा दिन बस बिस्तर पर ही पड़ी रहती तो ख्ाुश तेरे कोई भाई होते तो आज मेरी ये हालत नहीं होती।

ये कैसी बातें करिश्मा मां तुम बीमार हो इसलिए कुछ नहीं कर पा रही हूं और मीराबाई होता तो वो भी यही करता जो मैं कर रहा हूं जो हिस्सा बचाए अब तुम आराम करो मैं चलती हूं और ज्यादा सोचना मत।

इतना कहकर सीनू सब्जी का ठेला लेकर बाजार की तरफ चली गई। उसने भले ही अपनी मां को दिलासा दे दिया था लेकिन सच तो ये था कि उसे भी किसी सहारे की जरूरत थी। एक भाई की कमी उसे भी महसूस होती थी लेकिन हालात से समझौता करना सीनू को आता था वो सब कुछ भूलकर सब्जी बेचने तक कभी भाई वायदा करके बाइक पर करीब 22 23 साल का लड़का था जो बाइक रोक कर किसी से फोन पर बात करने लगा।

अरे कैसी बातें करें तो ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। वह सारा समान गरीब बच्चों के लिए उन तक पहुंचना चाहिए। तुम रुको मैं आता हूं जल्दी फिर देखता हूं।

वो लड़का आदित्य था जो एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था साथी एक समाजसेवी संस्था से भी जुड़ा था। सीनू ने उसे देखा तो उससे बोली भैया ओ पैसा कुछ सब्जी भाजी ले जाओ घर के लिए सबकी सब एकदम ताजी है।

नई गुड़िया अभी घर नहीं जा रही। कहीं और जाना फिर मिल जाएगा।

आदित्य की बात सुनकर सीनू का चेहरा उतर जाता है। आदित्य जैसे जाने के लिए अपनी बाइक स्टार्ट करता है तो वो स्टार्ट नहीं होती। वो कई बार कोशिश करता है लिक्विड पीकर उसे देर हो रही थी अब परेशान होने लगा। ये देखकर सीनू ने उससे कहा भैया जी आपने मुझे सब्जी नहीं खरीदी ना तो देखो आपकी फटी पटिया भी बुरा मान गई लेकिन आप चिंता मत करो। आप दो मिनट रुको मैं किसी को जानती हूं जो आपकी मदद कर सकता है।

सीनू अदिति को अपनी सब्जियों के पास छोड़कर चली गई। कुछ ही मिनटों में वो अपने साथ एक मैकेनिक को ले आई जिसकी दुकान पास में थी उसने आदित्य से कहा लो भैया ये हैं गाड़ियों की डॉक्टर। ये सब ठीक कर देंगी।

आदित्य सीनू की बात पर मुस्कुरा देता है। मैकेनिक अपने काम पर लग जाता है। आदित्य सीनू से कहता है गुड़िया तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया तो मदद ना करती तो पता नहीं कितनी देर लग जाती। वैसे नाम क्या तुम्हारा और तुम्हारे पापा का मेरा नाम सीनू है और मेरे पापा क़ुतुब भगवान जी के पास चले गए। कई साल पहले और हमारी मां और खनक मरकर में बस मावल में।

मां भी बहुत बीमार हैं। वो तो बिस्तर से उठ भी नहीं सकती अरे तुम रोज यहां केले की सब्जी बेचती हो तुम्हारी मदद के लिए कोई नहीं है।

नहीं बनाया जी। कोई नहीं ये मेरी मदद करने को आम आदमी कर तो मेरी मदत। कुछ सब्जियां खरीद लो। 4 घंटे हो गए या खड़े खड़े आज तो बोनी भी मुश्किल लग रही है।

रक्षाबंधन आने वाला है। सोचा था सब्जी बेचकर जो पैसे मिलेंगे उनसे खूब सारी राखियां ले आएंगी तो उन्हें बेचकर और अच्छी कमाई हो जाएगी। और फिर फिर मैं फिर क्या बताऊं गुड़िया क्या करना चाहती वापस भैया मैं अपनी मां को पहले जैसे चलते फिरते देखना चाहती हूं। मैंने सोचा था कि अगर थोड़ी कमाई हो जाएगी तो इतनी अच्छी डॉक्टर के पास लेकर जाउंगी।

इतना कहते ही सीनू रोने लगती। इतनी कम उम्र में सीने में इतनी समझदारी देखकर आदित्य दंग रह जाता है। वह मनी बन सीनू की मदद करने का फैसला कर लेता है। वो सीनू की सब्जियों को अलर्ट पलटकर देखता है और उससे कहता है अरे मैं तो भूल गया था। मैं एक समाजसेवी संस्था से जुड़ा हूं। वहां कल गरीब बच्चों को खाना खिलाने वाले तुम रुको जरा एक मिनट।

आदित्य तुरंत किसी को फोन लगाता है और कुछ देर बात करने के बाद सीलू से कहता है चलो गुड़िया हो गया तुम्हारा काम तुम फटाफट पैसे जोड़ो और मुझे बता। टिकट अभी थोड़ी देर में एक लड़का आएगा और तुम्हारी सारी सब्जियां लेकर जाएगा टिकट खरीद वापस यह आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

आप भी तो आपनी तुम्हारी बहुत बड़ी मदद कर दी।

अरे नहीं गुड़िया सब्जी तो कहीं न कहीं से खरीदनी थी तो तुमसे ले ली। वैसे अब खुश तो न तुम बहुत खुश हूं भैया अब आप देखना।

एक से एक राखी खरीदकर लाऊंगी और उन्हें बेचकर खूब पैसे का माँगी पेज फिर बच्चा हो जाएगा।

खुशी खुशी अच्छा ये लो पैसे।

लेकिन श्री ये तो मेरी सब्जी के दाम से ज्यादा पैसे भैया मैं कह रही हो तो मैं भी छोटी बहन समझ के ढेरों लो। और हां ये तो मेरा फोन नंबर कोई भी मदद चाहिए हो तो फोन करना ठीक है।

मैकेनिक भी अदिति की बाइक ठीक कर दी थी। अदिति सीनू के सिर पर हाथ रखता है और फिर अपनी बाइक लेकर चला जाता है। सीनू काफी देर तक अदिति के बारे में सोचती रही।

शाम के वक्त अदिति की संस्था से एक लड़का देसी रूप से सारी सब्जी ले जाता है। सीनू बहुत खुश थी वो सारे पैसों से जाकर नए नए डिजाइन की राखियां खरीद लेती है और उन्हें अपने ठेले में सजाकर रक्षाबंधन से गिरते हुए बाजार आ जाती है और जोर से चिल्लाती है जहां लोग राखी गोटे वाली फूल वाली गोटे वाली राखी सुन्दर सुन्दर राखी ले लो।

सीनू कई घंटो तक ऐसी आवाज लगाते रहते हैं पर कोई भी उसे राखी नहीं खरीद रहा था। घर से कुछ दूर राखियों की बड़ी सी दुकान थी जहां सीनू से ज्यादा वेरायटी की राखियां थी। इसी लिए सभी लोग उसी दुकान से राखियां खरीद रहे थे। ये देख कर सी रूह फिर से उदास हो गई थी। श्यामू गई पर उसकी एक भी राखी नहीं बिकी। वो अपनी राखियों के साथ घर पहुंची तो उसे उदास देखकर सविता ने पूछा क्या हुआ सीनू जाते हुए तू बड़ी खुशी तू क्यों बताना।

पूरा दिन धूप में चिल्लाती रही पर किसी ने एक भी राखी नहीं खरीदी मुझसे। सब लोग उस रामलाल की दुकान पर ही जा रही थी कल रक्षाबंधन ने अगर कल भी मेरी राखियां नहीं बिकी तो क्या होगा।

हिम्मत मचार बेटी भगवान किसी को तो भेजेंगी। सीनू ने अपनी सारी पैसे राखी खरीदने में लगा दिए थे अब तो उसके पास बेचने के लिए सब्जियां भी नहीं थी और ना ही वापस सब्जी खरीदने के लिए पैसे। अगले दिन रक्षाबंधन वो सुबह सुबह ही अपनी राखियां लेकर बाजार पहुंच गया। एक दो लोगों ने आकर उसकी टाकिया देखी जरूर पर खरीदी नहीं। दोपहर में बेटी सीनू का सब्र टूटता जा रहा था तभी उसके सामने से आदित्य को आते दिखे।

पर यह आज 6 सेवा भरे गुड़िया में अच्छा गुड़िया तुम्हारी राखियां देखने आऊं और खरीदने भी अच्छा तो लीची की खेती की। इस पर कितना प्यारा गुड्डा लगा लें और ये पूर्व वाली अच्छी है ना।

चीनू खुश दिखने की कोशिश तो करती थी पर आदित्य उसका चेहरा देखकर सब समझ गया था। उसने आते हुए राखियों की दुकानें उसमें लगी भीड़ की देखी थी और उसे समझने में देर नहीं लगी कि सीनू की ने अपनी राखियां बेच पाना कितना मुश्किल था। उसने सीनू से कहा गुड़िया तुम बहुत छोटी। इतनी सी उम्र में तुमने जो हौसला है उसकी जितनी तारीफ की जाए वो कम है लेकिन मिठाई से काम नहीं चलेगा तुम्हें कुछ और सोचना होगा।

अमन मतलब दुनिया में कुछ समझी नहीं।

आदित्य उसकी तरफ देखकर मुस्कुराता है और अपनी बाइक साइड में लगा कर सीनू की जगह जाकर खड़ा हो जाता है और जोर जोर से चिल्लाने लगते हैं लैला ओ लैला। किस्मत वाली इरा के लिए लोग इसे खरीद दोगे तो किस्मत खुल जाएगी। हर मुश्किल दूर भाग जाएगी। जिस भाई की कलाई पर बांधेगी ये राखी उसकी उमर सौ साल की हो जाएगी। लैला ले लो ले लो।

आदित्य की पर्सनैलिटी बहुत अच्छी थी। लोग उसे राखियां बेचते हुए देखकर पहले चौंके थे। ऊपर से आर्डर के तो को बुलाने का तरीका भी मजेदार किस्मत खुल जाए। धीरे धीरे लोग उसके पास आते गया जैसी उन्होंने राखियां बेचते हुए की कला और आदि के इसी तरह मजेदार बातें कहकर लोगों को आकर्षित करता गया। कुछ ही देर में सोनू की सारी राखियां बिक गई। ये देखकर आदित्य बहुत खुश हुआ। उसने सीनू से कहा दे खगड़िया।

ऐसे वेश जैसा मन सारी राखियां बिक गई तुम्हारी नहीं बस यह सारी नहीं बिकी। मैंने एक राखी बचाकर रखी है लेकिन क्यों गुड़िया। अभी तो तुमने ग्राहक से काफी सारी राखियां बिक गई हैं उसके लिए नहीं बची नहीं राखी उसे क्यों दी।

अस्वीकरण :- यह कहानी Best Hindi Kahaniya से ली गई है

Leave a Comment