poor girl and magic pot | गरीब लड़की और जादुई मटका

भोपालपटनम। गांवों में पानी की बड़ी किल्लत थी। अगर किसी को भी पानी चाहिए होता तो उसे पड़ोस के गांव में जाकर पानी लेना होता था। उसी गांव में वीरा और रतना नाम का एक जोड़ा रहता था। उनकी एक बेटी थी चांदनी जिसे पढ़ने की बड़ी इच्छा थी लेकिन उसके मां बाबा ने उसे स्कूल नहीं भेजा इसीलिए वह घर पर ही कुछ किताबें पढ़ती थी। रत्ना और वीरा दोनों खेतों में काम करने जाते थे। रत्ना घर पहुंची। चांदनी कितनी बार बोला है किताबें लेकर मत बैठ जाया करो। अगर तुम किताब पर रहोगे तो पानी लेने पहुंच जाएगा।

मां मुझे पढ़ना है। मैं पानी लेने नहीं जा सकती।

पांच महिलाओं की तरह क्या आप लेंगे। किससे नहाएं। किससे खाना बनाएंगे कपड़े कैसे धोएंगे तो दूर पैदल चलकर जाऊंगी तो मेरे पैर में दर्द हो जाएगा।

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शिकायत करके घर बैठने से तो पानी हमारे पास नहीं आएगा ना। पहले से ही पूरा गांव सूखे से जूझ रहा है और हर कोई दूर ही जाता है पानी लेने के लिए। पता है तुम्हें।

हां आज का दिन तुम चली जाओ और पानी लेकर आ जाओ। क्यों तुम क्यों नहीं जाओगे।

मेहंदी लगा रखी है पैरों में।

मेरे पैरों में बहुत टैटू रहा है।

ठीक है मैं पानी लेने जाऊंगी लेकिन फिर क्या तुम काम करने होंगे। तभी पीरा आ गया और उसने मां और बेटी की बातचीत सुनी क्यों। आदमी तुम अब तक पानी लेने के लिए क्यों नहीं गई।

मेरे पैरों में टैटू रह मैं दो किलोमीटर पैदल चल सकती हूं। मां को बेचता ना देखो अगर तुम पानी लेने नहीं जाओगी तो मां काम पर नहीं जा पाएगी और हमें खाना खाने के लिए पैसे भी नहीं मिलेंगे इसीलिए तुम्हें जॉब और पानी लेकर आ जाओ। दोनों मां बाप ने उसका कोई बहाना नहीं सुना और उसे पानी लाने के लिए कहते ही रहे पर चांदनी मन मारकर आखिर उठी गई। उसने घड़े लिए और पानी लेने के लिए धीरे धीरे चलने लगी। रास्ते में उसकी अपनी सहेली रूपा से मुलाकात हुई। वह भी कंधे पर दो घंटे के लिए पानी लेने जा रही थी।

जाने क्या हुआ घर पर कुछ काम था इसीलिए तेरे गेट तक कितने चक्कर लगा लिए। मैंने तय किया है तुम्हारे कितने चक्कर गए। मैंने शुरू किया। शाम तक मैं कितने घड़े पानी ला सकूंगी।

देखती हूं रूपा बात करते करते अपने रास्ते चलती रही और पानी की जगह पर पहुंच गई। किरण ने अपनी अपनी घड़ी में पानी भरा और वापस घर लौटने लगी।

इतना लंबा चलने और पानी के भारी गाड़ी ले जाने से मेरे पैरों और कंधों तक ढोते मेरी नजरों से बचते पानी का पूरा तालाब चाहिए तो तुम्हारे घर में भी वही हाल है।

वो दोनों बातें करती हुईं। इसी तरह अपने घर की ओर बढ़ती रही उन दोनों की एक ही शिकायत थी कि उनके मां बाप ने इतनी दूर पानी भरने के लिए रोज पीसते हैं। घर पहुंचने के बाद चांदनी ने घर के बर्तन में पानी भरा और आराम करने चली गई। इस बीच उसके मां पापा काम से घर वापस आए और चांदनी को आराम करते देख उन्हें लगा कि वो थक गई है। जब चांदनी उठी तो उसने अपनी मां को बाहर चूल्हे पर खाना बनाते हुए देखा वो तुरंत उसके पास के नाम लिखे दस मिनट में तीनों ने एक साथ बैठकर खाना खाया और फिर सो गई। रात को चांदनी सपने में बात करने लगी।

स्कूल जाने पर नार पानी नहीं ला सकती मेरी तरफ पीठ ने तो टैटू तेरी मेरी क्या गलती थी।

उसकी बात सुनकर रत्ना जागे और समझ गई कि वो सपना देख रही है। तब उसने उसके हाथ और पैर देखे तो वो ठप होने से लाल हो रहे थे। जिसे देखकर रत्ना को बहुत दुख हुआ। अगर मैं काम पर नहीं जाऊंगी तो हमारे पास खाने के लिए कुछ भी नहीं होगा और अगर तुम पानी के लिए नहीं जाओगी तो पीने के लिए पानी नहीं होगा। अगर हम किसी और जगह जाकर बसने के बारे में सोचते हैं तो हमें वहां घर का किराया देना होगा। बिजली का बिल पानी का बिल और पता नहीं किस किस तरह के बिल। हमारी सारी तनखा इन चीजों में ही खर्च हो जाएगी और हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं होगा। कम से कम यहां हमारे पास शांति सिखाने के लिए तो होता है लेकिन कहीं और रहने के लिए। अपनी इस हालत पर रत्ना को बहुत दुख हो रहा था। अचानक चांदनी जागे और उसने अपनी मां को रोते हुए देखा। चांदनी ने अपनी मां से बात की और समझाया। वे दोनों फिर से सोने चली गई। अगले दिन चांदनी बिना किसी के कुछ कहे घड़े लेकर पानी लेने के लिए निकल गई। लाते समय कुछ हद तक गई थी लेकिन फिर भी लगातार चलती रही और चलती रही। फिर रास्ते में उसने एक बड़ी चट्टान के पास एक साधु को बेहोश पड़े देखा तो और भी एक ने उस साधु पानी के लिए तड़प रहे थे। चांडी ने जब उन साधु को इस तरह पानी के लिए तड़पते देखा तो तुरंत अपने भरे हुए घड़े जमीन पर रख दिए और फिर जाकर साधू की बैटरी में मदद की। मुझे बहुत प्यास लगी है। बेटी पीने का पानी दे दो। अब देखिए ना

तो पीने के लिए पानी देते हैं। चांडी ने फिर अपने एक कमरे से पानी लेकर साधु को पीने के लिए दिया और इसके बाद साधु को काफी अच्छा लगने लगा। भगवान भला करे बैठे साधु चांडी को दिखा कि उसके। पैर और हाथ दोनों लाल हो रहे थे और छाले पड़े हुए थे।

क्या कुछ और करनी चाहिए। थोड़ा और पानी पिलाओ नहीं बेटा मैं संतुष्ट हूं लेकिन तुम इतनी थकी हुई क्यों लग रही हो और तुम्हारे हाथ पैर पर इतने छोटे कैसे। तुम इस तरह से पानी क्यों ले जा रही हो। तुम्हारे माता पिता कहां है। उसकी बातें सुनकर चांदनी रोने लगी। उसने बताया कि उसके मां बाप बहुत गरीब है और वह रोज मजदूरी के लिए जाते हैं। अगर वे काम नहीं करेंगे तो उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं होगा। उसकी सारी व्यथा सुनकर उदास मधु बेटे इतना कहते हुए साध्वी चानी को पानी से भरा एक जादुई घड़ा दिया। देखो यह जादुई घड़ा है जो भी तुम मांगोगे ये तुम्हें वो सब देगा और इससे तुम अपनी हर इच्छा पूरी कर सकती हो कर साधु चले गए। आपका धन्यवाद एक चांदनी जादुई बटन को गांव के टैंक के पास लेकर गई जिसमें पानी न होने की वजह से वो ऐसे ही बेकार पड़ा था। उसने उस जादुई घड़े को उसके नल के नीचे लगा दिया। इसके बाद इस गांव के लोगों की पानी की कमी की समस्या हल हो गई और पूरे गांव को भरपूर पानी मिलने लगा। इसके बाद जानवी ने स्कूल जाना और पढ़ना भी शुरू कर दिया। सुंदर पल्ली नाम की गांव में सुदर्शन नाम का एक अमीर आदमी रहता था। उसकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी और उसका एक बेटा था जिसका नाम था हरीश देखो बेटा ध्यान से सुनो हम अमीर लोग हैं और हमने मजदूरों के लिए दयालु होने की कोई जरूरत नहीं उनसे हमेशा सरा रूप से बात किया करो तभी वो हमारी बात मानेंगे।

पापा आप ऐसा कह रहे हैं लेकिन मेरे टीचर कह दें कि किसी के साथ बुरा मत करो सभी के साथ एक जैसा बर्ताव करें। चाहे अमीर हो या गरीब लेकिन आप तो एकदम उल्टा करें।

इसके बाद मानो मैं तुम्हारा अपना क्या सोचना है।

बेटा पापा मुझे सबके साथ अच्छे से रहना और प्यार करना अच्छा लगता है। अगर आपने पैसे नहीं तब आप जैसे चाहें वैसे ही ये कहता हुआ वो घर से निकल गया। पिता अपने बेटे को घूरता रह गया। हरीश साइकिल लेकर बाहर निकल पड़ा। उसी गांव में एक गरीब लड़का गोविंद रहता था उसका परिवार इतना गरीब था कि उसके माता पिता अपना लिया हुआ कर्ज नहीं चुका पाए और उन्होंने आत्महत्या कर ली। गोविंद अब अनाथ हो गया था।

आपको। संता ने हमेशा मेरे साथ रहेंगे तो एक अनाथ हो गया और बिल्कुल अकेला रह गया। मेरे पास अपना कुछ खाने के लिए होता है ना ही पहनने के लिए अपने कपड़े और ना ही पहनने के लिए किताबें अनाथ होने की वजह से मुझे किसी न किसी काम के लिए बुलाते हैं। पत्नी ने मुझे कुछ खाने के लिए पहनने के लिए पुराने कपड़े।

अस्वीकरण :- यह कहानी Hindi Moral Stories से ली गई है

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