return of mother-in-law | सास की वापसी

साल्व की वापसी। ये कहानी बच्चों के उस कर्तव्य को बताती है जिसकी उम्मीद में हर मां अपने बेटे के लिए लड़की लाने का सपना देखती है। क्या तुम्हारी मां को मैं शादी में भी देख रही थी कुछ बोलती नहीं है।

हां वो पापा के जाने के बाद मां को सदमा लग गया था। वो देखती समझती तो सबकुछ है लेकिन बोलती नहीं है। वो आज भी पापा के समय में ही जी रही है बहुत प्यार था मां पापा के बीच। शिल्पी को साहस पर दया आती है। वह सोचती हैं कि वह साहस से बात करेगी और समझाएगी कि जीवन में आगे बढ़ना ही नियम है। मांझी खाना खा लीजिए वो गहना आपकी सोने का वक्त राय लेकर जा लेकर जाएगा। यहां से इन्होंने कुछ खाया नहीं है और मैं।

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सास बहु के हाथ से खाना लेकर थाली फेंक देती हैं।

रोहित के पापा वो आज दफ्तर से तभी उनके साथ मैं खाना खाती हूं। वैसे काफी देर से बिकना ही रह न जाने कहां चले गए हैं।

शिल्पी को साहस की हालत पर दया आती है। वह सोचती है कि कैसे भी करके वह साहस को ठीक करेगी लेकिन करती तो क्या करती।

शिल्पी तो साड़ी पहनकर सूट पहना कर पापा मेरी सास को ससुर जी के जाने के बाद सदमा लगा है। समझ में नहीं आता उनको पुराने दिनों से कैसे बाहर निकालें और और तो उनका इलाज करवा डॉक्टर के पास लेकर जा।

return of mother-in-law | सास की वापसी

लेकिन पापा सदमे के लिए तो कोई दवाई नहीं होती।

बेटा सदमा वो शब्द है जो हम बोलचाल की भाषा में इस्तमाल करते हैं। दरअसल ये दिमागी बीमारी है जिसे डिप्रेशन कहते हैं। तुम अच्छे से डॉक्टर के पास अपनी सास को लेकर जाओ।

शिल्पी सास के पास जाती है माझी चलिए घूमने जलते हैं। सास निराश होकर कहती हैं कहां चलना है बहू। वैसे भी अब मन नहीं करता कहीं जाने का बाजार में ही ठीक हो जाएंगे तो मुझे घर पर रहना चाहिए ना और चाय मांगते हैं। आते ही उन्हें चाय देनी पड़ती है मैं करीब पांच मिनट डॉक्टर हैं उनके पास क्या आरएनआई तो मुझे क्या हुआ। मैंने कई जाऊँगी।

सास बहू के साथ डॉक्टर के पास नहीं जाती। एक दिन बेटा घर की दीवार पर पिता की फोटो लगाकर माला डाल रहा होता है कि सास बोल पड़ती है।

क्या। मेरे पति की फोटो पर माला चढ़ा रहे। जानते हो कि किन लोगों के फोटो पर माला जोर दिया। मां पिताजी अब नहीं रहे ये समझना चाहिए तुम्हें क्या हो गया है। पागल हो गया क्या।

सुबह शिल्पी को उसका पति मां की सारी बात बताता है।

मां को पागलखाने छुड़ाते हैं और कोई चारा नहीं है। कम से कम वक्त पर पूरा ध्यान रखा जाएगा।

हरे क्या हो गया है तुम्हें कैसी बातें मारे वो तुम्हारी। उनका ख्याल मैं रखूंगी। मेरी पापा से बात हुई थी कह रहे थे कि ये कोई दिमागी बीमारी होती है। तभी शिल्पी की चाची सास वहां आ जाती है। कैसी बीमारी कोई बीमारी नहीं है नाटक। नाटक कामधाम ना करने के खुद को बेचारा बताने के लिए दुनिया में जो आया है वो जाएगा ही ना किया ही जाएगा।

सही बोल रिया चाची अरे पापा को गए तीन महीने हो गए मेरी शादी हो गई है। ये नहीं कि बहू के साथ अच्छे से वक्त बिताएं।

शिल्पी की नजर बाहर बैठी सास पर पड़ती है जो बिल्कुल गुमसुम चुपचाप बैठी होती है। क्या चाची वैसे भी आपके घर में भी जबसे भाभी आई है आप भी तो काम नहीं करती। मां को क्या जरूरत है काम की। जब मैं भी हूं तो औरत मां को जानती नहीं हूं। ये पापा थे तब भी पापा के पीछे लगी रहती थी। हर काम सिर्फ पापा के लिए करती और उन्हीं के कहने पर करती।

देखो मैं समझ सकती हूं माजी पिताजी से काफी जुड़ी थी लेकिन पिताजी के जाने के बाद वो उन्हें भूल नहीं पा रही है। मां अभी भी उसी दुनिया में है जहां वो पिताजी के साथ थी लेकिन अब उन्हें वापस इस दुनिया में लाना होगा। इसके तहत यह ज्ञान दुनिया दुनिया ले रखा है। अरे पागल हो गई है। पति के लिए इसका तो किसी अस्पताल या पागलखाने में जुडाव सही कह रही हूं। चाची रात भर जागना न खाना न पीना न किसी से बात करना इनका एक ही गुजारा है। क्या इन्हें किसी पागलखाने ही छुड़ाते हैं।

बहू के लाख मना करने पर भी सदमे में बैठी मां को लेकर बेटा अस्पताल चला जाता है।

मां आज तो यही रहना मैं जा रहा हूं।

मां की दिमागी रूप से बीमार थी बेटी को बस जाता हुआ देखती है। घर आते ही बहू पूछती है आसपास के लोगों को तुमने देखा क्या सब पागलों जैसा व्यवहार कर रहे थे। मां वहां कैसे रहेंगे।

औरत यहां कैसे रहेगी वहां रहेंगी तो डॉक्टर की निगरानी में रहेगी न। समय से दवाई खाना बनाया वह कैसे खाने की प्लेट को फेंक दिया था और मां को दवाई की भी ज़रूरत है।

बहू को अब घर में सास के बिना चैन नहीं मिलता वह सोचती है कि क्या पागलखाने में रहने से उसकी सास ठीक हो जाएगी। पति से लाख कोशिश करती है कि वो सास को घर ले आए पर वो नहीं मानते फिर एक दिन माजी देखिए मैं आपके लिए क्या खाने के लिए लेकर आईं। आपकी फेवरिट बेसन के गट्टे सासू पागलखाने में रहकर और शांत हो जाती है उसे चुपचाप देखती रहती है।

ये नहीं आए लेकिन मुझे यह ठीक नहीं लगता।

मुझे मामाजी भर चलेगी लेकिन उससे पहले आप मेरे साथ चली दो। सास को पार्क में ले जाती है माजी देखिए कितनी खुली साफ हवा है या जोर जोर से सांस लेने से मना अल्का हो जाता है वो सास को योगा कराने ले जाता। है।

ऐसे लोगों को योगा जरूर करना चाहिए। इससे शरीर ठीक होता है और खासकर दिमाग तो रोज़ एक घंटे के लिए आप अस्पताल जाकर इनको योगा की ट्रेनिंग दे सकते हैं क्या।

हां हां क्यों ना ही हमारा तो काम ही यही है। वैसे आप अपना काम निबटा देना फील्ड वर्क से धक्के देना।

अब क्या था सुबह शाम बहुएं अस्पताल जाकर सास को वॉक पर ले जाती दवाई के साथ योगा सास की तबियत धीरे धीरे ठीक होने लगती है।

एक दिन बहू मैंने तो सोच लिया था कि जीवन खत्म हो गया है लेकिन तूने मुझे संभाल लिया।

कैसी बातें रीमा जी। सास बिना ससुराल अच्छा नहीं लगता मैं जानती थी कि आपको किसी बात का सदमा लगा है और सदमे से निकालना जरूरी था। चलिए घर चलते हैं न ही बहू।

बहू हैरान हो जाती है कैसी बात कर है मारपीट कर आप क्या है आपको सम्हाला है मेरा साथ देना है माजी सदमा। किसी भी चीज़ का लग सकता है लेकिन उसे पागलपन मानकर ज़िन्दगी की उम्मीद छोड़ना गलत है। चलिए मैं आपको घर ले जाने आई हूं। मां बहू के साथ घर जाती है जहां बेटा मां को देखता ही रह जाता है क्या देख रहा है और पूरे घर में पापा की फोटो क्यों नहीं है। पता है न। किसी के चले जाने के बाद उनकी फोटो पर हार लगा है। जाता है।

अस्वीकरण :- यह कहानी Bedtime से ली गई है

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